1
तीर्थ के ध्यान से एक हजार पल्योपम के पाप नाश होते है।
2
तीर्थयात्रा के लिए प्रयाण करने से अनेक सागरोपम के पाप नष्ट होते हैं।
3
तीर्थ का आश्रय करने से सद्गति सुरक्षित बनती है।
4
तीर्थयात्रा का अभिग्रह करने से एक लाख पल्योपम के पाप नष्ट होते हैं।
5
तीर्थनायक प्रभु के मुखदर्शन से श्री (संपत्ति) और सुख की प्राप्ति होती है।
6
तीर्थनायक प्रभु की पूजा से देवलोक में जन्म मिलता है।
7
तीर्थयात्रा-पूजा के तीव्रभाव-परिणाम से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

