1

तीर्थ के ध्यान से एक हजार पल्योपम के पाप नाश होते है।

2

तीर्थयात्रा के लिए प्रयाण करने से अनेक सागरोपम के पाप नष्ट होते हैं।

3

तीर्थ का आश्रय करने से सद्गति सुरक्षित बनती है।

4

तीर्थयात्रा का अभिग्रह करने से एक लाख पल्योपम के पाप नष्ट होते हैं।

5

तीर्थनायक प्रभु के मुखदर्शन से श्री (संपत्ति) और सुख की प्राप्ति होती है।

6

तीर्थनायक प्रभु की पूजा से देवलोक में जन्म मिलता है।

7

तीर्थयात्रा-पूजा के तीव्रभाव-परिणाम से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

स्पर्शना फल

श्री नंदीश्वर तीर्थ की यात्रा से, दुगुना लाभ श्री कुंडलगिरितीर्थ यात्रा, उससे तीनगुना लाभ रूचकगिरियात्रा, उससे चारगुना लाभ गजदंतगरि, उससे दुगुना लाभ जंबूवृक्ष चैत्य, उससे छःगुना लाभ धातकी वृक्ष चैत्य, उससे बारहगुना लाभ पुष्करवृक्ष चैत्य, उससे 100 गुना लाभ मेरुचूला चैत्य, उससे 1000 गुना लाभ सम्मेतशिखर यात्रा, उससे लाखगुना रैवतगिरि, उससे करोडगुना श्री शत्रुंजय की यात्रा में लाभ…